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हिमाचल में दूसरे राज्यों के व्यावसायिक वाहनों पर खत्म होगा कंपोजिट शुल्क? सरकार ने जारी किया नए नियमों का ड्राफ्ट

 

➤ मोटर व्हीकल रूल्स 1999 से नियम 69-ए हटाने का प्रस्ताव

➤ ड्राफ्ट पर 30 दिन में आपत्तियां और सुझाव मांगे गए

➤ प्रस्ताव लागू हुआ तो दूसरे राज्यों के वाहनों से केवल एसआरटी लिया जाएगा


शिमला। हिमाचल प्रदेश में दूसरे राज्यों से आने वाले व्यावसायिक और पर्यटक वाहनों से लिए जाने वाले कंपोजिट शुल्क को समाप्त करने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम बढ़ाया है। इसके लिए हिमाचल प्रदेश मोटर व्हीकल रूल्स, 1999 में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया गया है। प्रस्तावित संशोधन में नियम 69-ए को हटाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, यह अभी अंतिम नियम नहीं है। ड्राफ्ट पर 30 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संशोधित नियम लागू किए जाएंगे।

मौजूदा व्यवस्था के तहत अन्य राज्यों से हिमाचल प्रदेश में प्रवेश करने वाले कुछ ऑल इंडिया परमिट वाले पर्यटक वाहनों से कंपोजिट शुल्क लिया जाता है। इसके साथ विशेष पथकर यानी एसआरटी भी देय होता है। परिवहन विभाग की ओर से यह शुल्क राज्य के प्रवेश द्वारों पर लिया जाता है और वाहन संचालकों को ऑनलाइन माध्यम से भी कर जमा करने की सुविधा उपलब्ध है। प्रस्तावित संशोधन लागू होने के बाद कंपोजिट शुल्क की यह व्यवस्था समाप्त करने और संबंधित वाहनों से केवल एसआरटी लेने का प्रावधान किया गया है।

सरकार की ओर से जारी ड्राफ्ट का नाम हिमाचल प्रदेश मोटर व्हीकल (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 रखा गया है। इसमें हिमाचल प्रदेश मोटर व्हीकल रूल्स, 1999 से नियम 69-ए हटाने का प्रस्ताव है। यह संशोधन मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं के तहत प्रस्तावित किया गया है। अंतिम रूप से नियम लागू होने से पहले लोगों और संबंधित पक्षों को अपनी आपत्तियां तथा सुझाव देने का अवसर दिया गया है।

क्या है नियम 69-ए

नियम 69-ए ऑल इंडिया परमिट के तहत हिमाचल में संचालित होने वाले कुछ पर्यटक वाहनों पर कंपोजिट शुल्क से संबंधित है। हिमाचल प्रदेश मोटर व्हीकल रूल्स के उपलब्ध आधिकारिक पाठ में यह प्रावधान दूसरे राज्य की स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी या केंद्रशासित प्रदेश की अथॉरिटी से जारी ऑल इंडिया परमिट वाले पर्यटक वाहनों से संबंधित बताया गया है।

मौजूदा नियमों में अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए कंपोजिट शुल्क निर्धारित किया गया था। इसके अलावा निर्धारित समय पर शुल्क जमा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त राशि वसूलने का भी प्रावधान नियमों में रहा है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य इसी नियम 69-ए को हटाना है।

शुल्क व्यवस्था में क्या बदलाव प्रस्तावित है

प्रस्तावित संशोधन लागू होने की स्थिति में दूसरे राज्यों से हिमाचल आने वाले संबंधित व्यावसायिक वाहनों पर वर्तमान कंपोजिट शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके बजाय वाहनों से लागू विशेष पथकर यानी एसआरटी लिया जाएगा। इसका सीधा असर उन वाहन संचालकों पर पड़ेगा जो ऑल इंडिया परमिट के तहत हिमाचल में पर्यटक या व्यावसायिक संचालन करते हैं।

सरकार के ड्राफ्ट के मुताबिक नियमों में संशोधन की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे प्रस्तावित बदलाव के तौर पर देखना जरूरी है। 30 दिन की अवधि में प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार के बाद ही अंतिम अधिसूचना जारी होने की स्थिति स्पष्ट होगी।

हर साल बड़ी संख्या में वाहन हिमाचल आते हैं

उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में हर साल करीब एक से डेढ़ लाख व्यावसायिक वाहन दूसरे राज्यों से प्रवेश करते हैं। प्रस्तावित बदलाव ऐसे वाहनों के संचालन और कर भुगतान व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

हिमाचल जैसे पर्यटन राज्य में बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटक वाहनों की आवाजाही बड़ी संख्या में होती है। विशेष रूप से पर्यटन सीजन के दौरान दूसरे राज्यों से आने वाली बसें और अन्य पर्यटक वाहन राज्य के विभिन्न पर्यटन स्थलों तक पहुंचते हैं। ऐसे में कंपोजिट शुल्क से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव का असर वाहन संचालकों की लागत और राज्य में प्रवेश की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

अभी अंतिम फैसला बाकी

महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने फिलहाल ड्राफ्ट जारी किया है, अंतिम संशोधित नियम लागू नहीं किए हैं। ड्राफ्ट पर 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद सरकार की ओर से प्राप्त सुझावों पर विचार किया जाएगा और आगे की प्रक्रिया के बाद संशोधित नियम अधिसूचित किए जा सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश के परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर मोटर वाहन कानूनों और नियमों की सूची उपलब्ध है, जिसमें HP Motor Vehicles Rules, 1999 भी शामिल हैं।

इस प्रस्तावित बदलाव के बाद सबसे बड़ा परिवर्तन यह होगा कि संबंधित ऑल इंडिया परमिट वाले वाहनों के लिए वर्तमान कंपोजिट शुल्क व्यवस्था समाप्त हो सकती है और एसआरटी भुगतान की व्यवस्था जारी रहेगी। हालांकि, अंतिम स्थिति 30 दिन की आपत्ति-सुझाव प्रक्रिया और उसके बाद जारी होने वाली अधिसूचना पर निर्भर करेगी।